अमर कर दो।।


होठों से छू लो तुम,मेरा गीत अमर कर दो...
बन जाओ मीत मेरे,मेरी प्रीत अमर कर दो।।
.
तुम आज भी ये गुनगुना रही हो?

हां ,तुमने क्या सोचा था तुम्हारे जाने के बाद में अपने पसंदीदा गीतों को बदल लूंगी?

हां ,क्यूंकि मुझे लगा था तुम सिर्फ प्यार में झूम संगीत को पसंदीदा बनाए हुए हो। 

तो तुमने भी यही सोच लिया कि अक्सर प्यार करने वाला स्थायी हो जाता है और वो कभी नहीं बिखेर सकता उस प्यार को कहीं ओर... तुम्हें ये याद नहीं रहा ना कि ठोकर मारने से चीजें अक्सर बिखर जाती है।

हां मुझे लगा था मैं कुछ भी करूं,तुम कभी नहीं जाओगी।

पर ऐसा हुआ नहीं, ह ना?

हूं।

तुम नहीं समझ पाए ना फिर से मेरे प्यार को।
मैं अक्सर तो गुनगुनाती थी...
ना उम्र की सीमा हो,ना जन्म का हो बंधन...
जब प्यार करे कोई,तो देखे केवल मन...
नई रीत चला कर तुम,ये रीत अमर कर दो।।

यार तुम भी ना,अभी भी उतनी ही पागल हो...

नहीं अब उतनी तो नहीं,हां अब भी मैं  सुनती हूं ये गीत मगर तुम्हें सोचकर नहीं,सिर्फ यूं ही क्यूंकि पसंदीदा जो ठहरा।

मैं भी तो पसंद था ना तुम्हें?

तुम थे,मगर तुम वक्त के साथ बदलते चले गए और ये गीत वक्त के साथ जरा भी नहीं बदला।

यार, मैं मानता हूं मैंने ठुकरा दिया था एक बार तुम्हें मगर प्लीज...
आकाश का सूनापन मेरे तन्हा मन में,
पायल छनकाती तुम आ जाओ जीवन में...
सांसें देकर अपनी संगीत अमर कर दो।।

तुम मेरे पसंदीदा गाने मत गुनगुनाया करो प्लीज,बहुत बुरा गाते हो पहले जैसे ही। हां,बस यही नहीं बदला तुममें।

मैं जब तक तुम्हारे साथ था इसे सिर्फ एक गाना समझता था,मुझे आज समझ आया कि कैसे तुम गाने को अंदर तक समेट लेती हो।

हां,इतनी तारीफें करने से अब मैं वापस नहीं आ जाऊंगी।

यार, मैं अब फिर से बदल गया हूं,तुम समझो ना...
जग ने छीना मुझसे, मुझे जो भी लगा प्यारा...
सब जीता कि ये मुझसे, मैं हरदम ही हारा...
तुम हार के दिल अपना,मेरी जीत अमर कर दो।।
एक बार फिर से हार दो ना ये अपना दिल...

यार,पर तुम फिर से बदल जाओगे...
चलो चलती हूं मैं,अब कुछ देर ओर ठहरी यहां तो मैं भी बदल जाऊं शायद।

तुम बिल्कुल भी नहीं बदली हो,सच में,अभी भी उतना ही जिंदा है प्यार तुममें...चलो ना एक बार साथ में गुनगुनाते हैं...

होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो,
बन जाओ मीत मेरी,मेरी प्रीत अमर कर दो।।

चलो ये कहानी अधूरी ही सही,मगर मैं गीतों को अपने अंदर समेटना सीख गया हूं।। मैं भी चलता हूं,तुम भी ख्याल रखना।।

.
.
.

        जब भी कभी जिक्र आता है पसंदीदा गानों का, मैं अक्सर जगजीत सिंह का ये गाना गुनगुना देती हूं जैसे इसके बाद बने ना जाने कितने गानों की सुंदरता को झुठला दिया हो मैंने। ना जाने कितना ही सुन्दर तरीके से पिरोया गया है शब्दों को इसमें, मेरा मन उस सुंदरता से कभी नहीं हट पाया। शायद मैं इस गाने से नहीं,इसके शब्दों से जुड़ी हुई हूं,संगीत का असर बस मेरे लिए एक पल की खुशी तक है परन्तु किसी गीत में पिरोए शब्दों को मैं महसूस कर पाती हूं अपने अंदर, हर वक्त जीता हुआ।।
                इस जीवंतता को आज मैंने यहां उतारने का निर्णय लिया ताकि वो बनी रहे इन पन्नों पर भी एक सच्ची सी प्रतीत होती काल्पनिक कहानी के रूप में।।
~ आदित्या Choudhary

Comments

  1. Beautifully written ❣️

    ReplyDelete
  2. This is something when someone writes from their heart 💜💜💜

    ReplyDelete
    Replies
    1. I don't know who r you,but Thankful to have these words from you☺️❤️

      Delete
  3. Coming again n again to this ❤️❤️ beautifully written

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular Posts