क्या कोई शर्त है?

मैं हमेशा उलझी रहती हूं सवालों में, और फिर से एक सवाल पूछ लेती हूं खुद से, क्या कोई शर्त है, नहीं उलझने की?

एक कमरे के कोने में बैठी मैं, मंद मगर गहरी सांसें लेती हुई लिखे जा रही हूं कुछ भी... और एक सवाल मन यही है कि क्या कोई शर्त है लिखने की?
                 यूं तो किसी भीड़ का एक हिस्सा ही हूं मैं,मगर मुझे लिखना है,मुझे लिखना है उस भीड़ के हर शख्स की जिन्दगी को पढ़कर ताकि उस भीड़ में शामिल होने वाला हर नया इंसान मुझे पढ़कर अपना पैर कुछ हद तक कुचलने से बचा सके।।
             मुझे नहीं लगता लिखने के लिए कुछ भी चाहिए,सिवाए एक कागज पेन के और इस आधुनिक दुनिया ने तो लिखना उससे भी आसान बना दिया है बस एक स्क्रीन तक। मुझे बचपन में अक्सर बिस्तर पर लेटे लेटे विचार आते थे,एक दो शायरियां भी बन जाती थी और उन्हें मैं सोने से पहले रट कर सोती थी कि सुबह इन्हें किसी पन्ने पर जरूर उतार दूंगी। मगर सुबह आंख खुलते ही सब इतना साफ जैसे कोई सफेद परदे के सब दाग़ रात में धूल गए हों। इस तरह ना जाने कितनी शायरियां मैंने मस्तिष्क पटल से ओझल की हैं। हां,कुछ लिखी भी हैं,सुबह नहीं, उसी समय बल्ब ऑन करके,तुरंत कागज़ पर उतारी थी। मगर अब,अब मोबाइल की स्क्रीन हमेशा आसपास ही होती है,पर लिखने वाले विचार कम हो गए शायद। वक्त कहां रह गया अब खाली बैठ कर विचार करने का,जिन्दगी की उलझनों में मेरे वो उलझे सवाल सुलझाने का। मगर कोई शर्त तो नहीं है लिखने की, मैं उलझनों को भी तो लिख सकती हूं। 
           लिखने की सुंदरता ये है कि आपके पन्ने आपसे कभी सवाल नहीं करते जब तक उन्हें कोई पढ़े नहीं,मगर क्या कोई अर्थ रह जाता है लिखने का जब तक कोई पढ़े नहीं? शायद इसमें ही अर्थ है लिखने का बिल्कुल भी सोचे बिना कि कोई पढ़ेगा,हम तभी अंदर छिपी असलियत को बाहर निकाल पाएंगे। फिर अगर किसी ने पढ़ भी लिया तो सवाल तो उठेंगे मगर उनके सच्चे जवाब हमारे पास होंगे क्यूं कि हमने अपने भीतर को कागज पर उतारा है और भीतर के पास शायद सभी सवालों के जवाब है।
           मुझे लिखते लिखते अभी यहीं विचार आया है कि मैं ये क्यूं लिख रही हूं? किसी ने पढ़ा तो वो क्या सोचेगा,क्यूं लिखा है ये सब? 
    ओहो! मुझे यही तो नहीं सोचना था कि किसी ने पढ़ा तो क्या होगा। खैर अभी भी यही सवाल बरकरार है,क्या कोई शर्त है लिखने की?
(By Picture:- कोई शर्त नहीं है लिखने की, तुम अपनी नई भाषा बनाकर भी लिख सकते हो।)

 ~आदित्याChoudhary

Comments

  1. ये सलंगित चित्र में क्या लिखा हुआ है? उसमें कुछ समझ में नहीं आया।

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    1. उसे समझना भी नहीं है, बस मैने खुद की language बना कर लिखा है... क्यूं कि शायद कोई शर्त नहीं है लिखने की।।

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