Almighty's lost LOVE.
लगता है,कोई है जो लिख रहा है...
एक अधूरे प्रेम की दास्तां
एक तरफ से,
या यूं कहूं एक तरफा अधूरा प्रेम
या एक तरफा प्रेम कहूं?
क्यूंकि दूसरा रंग चुका है,
किसी नए रंग में,
शायद कहीं ज्यादा गहरे रंग में
और एक है जो सिर्फ लिख रहा है
अपने उसी प्रेम के इंतजार में।
अपने लेख से
वो पूरा ब्रह्मांड नाप चुका है,
अब तक की सभी आकाश गंगाए
पार करके बस वो लिखता जा रहा है
ताकि खोज सके वही पुराना प्रेम।
शायद दूसरा उसके सामने ही है,
मगर अब वो प्रेम उसमें नहीं है,
वो अजनबी ना जाने कब मिलेगा,
सूरज तक की दूरी नाप आया है,
प्रकाश की गति से
सबका भीतर तय कर लिया है।
सबमें प्रेम भर दिया है उसने,
ताकि कहीं तो वो वापस पा सके
अपने समान आवृति की
आवाज में गुनगुनाते हुए किसी
पुराने
मिलते जुलते गीत को।
वो है जो खुद ढूंढ रहा है,
खुद की दुनिया* में,
अपनी दुनिया** को,
ना जाने कितने रंगों के सितारे
उसे मिले हैं,
कितने उपग्रहों में उसने ढूंढा है उसे,
मगर अभी भी उसकी खोज जारी है...
हर पल,
हर पल के हर हिस्से में,
और सुना है ब्रह्मांड का विस्तार
प्रतिपल होता चला जा रहा है।।
(दुनिया*- World, दुनिया**- his love means his world)
~आदित्याChoudhary


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