एक शहर।।

एक शहर है,
जो कभी सूखा हुआ करता था...
इस शहर की जमीं पर कोई पौधा बढ़ा न था कभी, फूल खिलने को तो इसकी आंखे मानो तरस गई थी।
         ये शहर दिन ब दिन खाली होने लगा था कुछ वक्त पहले,आज सालों बाद इस पर घोर अंधेरा छाया है, जैसे ये अंधेरा हो किसी नए दिन की शुरुआत का संकेत।
   गरजते बादल,चमकती बिजलियां, जैसे मना रही हों कोई नए जीवन की खुशियां।
इस शहर में आज जम कर बारिश हुई है,मिल गया है इसकी प्यासी धरती को पानी...अब यहां कोई कली खिलने का संकेत है,कई फूल लगने की महक है।
          जो बचे-खुचे लोग थे यहां,वो आज खुश हैं सालों बाद,के उनकी आस पूरी हुई श्वास से पहले। 

सिर्फ कुछ बूंदों से ये शहर चहक रहा है।

मगर और बूंदों की आस है अभी...

हमारा प्यार इसी चहकते शहर के जैसा है।
~ आदित्याChoudhary

~AdityaaChoudhary





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